बांडा विकास प्राधिकरण बनाम मोतीलाल अग्रवाल (मनु/सुको/0515/2011) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अधिग्रहित भूमि को बांडा विकास प्राधिकरण ने आवश्यक विकास के संपन्न करने के पश्चात रिहायसी योजना को लागू करने के लिए काम में लिया| प्लाटों का आवंटन किया तथा आर्थिक रूप से कमजोर व निचले आय वर्ग के लोगों के लिए फ्लैट बनाये और सामान्य एवं आरक्षित श्रेणी के लोगों को फ्लैट आवंटन के लिए आवेदनपत्र आमंत्रित किये और पात्र लोगों को आवंटित किये | इस दौरान बांडा विकास प्राधिकरण ने मात्र भारी व्यय ही नहीं उठाया बल्कि तृतीय पक्षकारों के हित में हक सृजित किया| इस दृश्यावली में धारा 6(1)घोषणा जारी होने से प्रकशन में 9 वर्ष व पंचाट पारित होने में 6 वर्ष का समय उच्च न्यायालय द्वारा प्रत्यर्थी संख्या 1 को साम्य राहत स्वीकार करने से पूर्व पर्याप्त से भी अधिक समझा जाना चाहिए था |
वास्तविक लोकतंत्र की चिंगारी सुलगाने का एक अभियान - (स्थान एवं समय की सीमितता को देखते हुए कानूनी जानकारी संक्षिप्त में दी जा रही है | आवश्यक होने पर पाठकगण दिए गए सन्दर्भ से इंटरनेट से भी विस्तृत जानकारी ले सकते हैं|पाठकों के विशेष अनुरोध पर ईमेल से भी विस्तृत मूल पाठ उपलब्ध करवाया जा सकता है| इस ब्लॉग में प्रकाशित सामग्री का गैर वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए पाठकों द्वारा साभार पुनः प्रकाशन किया जा सकता है| तार्किक असहमति वाली टिप्पणियों का स्वागत है| )
Wednesday, 1 February 2012
अधिग्रहण के विरुद्ध अपील उचित समय में हो
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